नीचे दिये गए गद्यांश को पढकर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
शुक्लोत्तर समालोचकों ने शुक्ल जी का महत्व स्वीकार करते हुए भी उनसे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद प्रकट किया। पं. नन्ददुलारे वाजपेयी ने हिन्दी साहित्य बीसवीं शताब्दी में शुक्ल जी के छायावाद रहस्यवाद विषयक विचारों की आलोचना की। वाजपेयी जी के अनुसार स्थूल व्यवहारवाद को निस्सीम बतलाकर और रहस्यवाद की कनकौए से तुलना कर विद्वान शुक्ल जी ने नवीन कविता के साथ अन्याय किया है। वाजपेयी जी का विचार है कि मनुष्य के अध्यात्म पक्ष का संपूर्ण निरूपण इस प्रकार की कविता की सीमा के अंतर्गत है। रहस्यवाद को कविता के क्षेत्र से ख़ारिज नहीं कर सकते। वे छायावाद के प्रारंभिक और समर्थक थे। उन्होंने छायावाद के आध्यात्मिक पक्ष को शिकार करते हुए भी यह प्रकट किया की छायावाद की मुख्य प्रेरणा धार्मिक न होकर मानवीय और सांस्कृतिक है।