निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए।
यदि हमारा वर्तमान बिगड़ता है तो उसका प्रभाव भावी जीवन पर भी पड़ सकता है। यदि हम हमेशा भविष्य की चिंता करने में ही अपना समय बरबाद करेंगे तो यह भी गलत होगा। भविष्य तो अभी आया नहीं। भविष्य में क्या होगा? कोई नहीं जान सका है और न ही जान सकता है, इसलिए भविष्य की चिंता करने में कोई लाभ नहीं होगा। भविष्य कि चिंता में अपने वर्तमान की शांति नष्ट मत करो। संसार में जो भी व्यक्ति महान् बने हैं, उन्होंने वर्तमान में ही जीना सीखा था। वर्तमान व्यक्ति की मुट्ठी में है, वह चाहे तो उसका सदुपयोग कर जीवन की ऊँचाई को छू ले या अपनी बरबादी का मूकदर्शक बना रहे। वर्तमान को स्वीकार कर ही हम श्रेष्ठता को प्राप्त कर सकता है। प्रत्येक व्यक्ति सुख और शांति का जीवन जीने की कामना करता है और यह कामना स्वाभाविक भी है। परंतु सुखी और शांति का जीवन जीना क्या चिंता और मानसिक घुटन के साथ रहने से संभव है? सर्वथा नहीं। मानसिक रूप से चिंतित रहने और बीती बातों पर सोचते रहने से तो जीवन में सुख और शांति का अनुभव करना संभव नहीं। लगातार घुटन का जीवन जीते रहने से व्यक्ति कई रोगों जैसे तनाव, रक्तचाप, मधुमेह आदि का शिकार हो जाएगा। इतना ही नहीं वह पारिवारिक जीवन का सुख और आनंद से भी वंचित रहेगा। स्वास्थ्य भी गिर जाएगा। परिजनों, मित्रों और संबंधियों से भी संबंध खराब हो सकते हैं। तो क्या करें? चिंता और मन-ही-मन में घुटते रहने के स्वभाव को बदलिए। अपने दृष्टिकोण सोच में परिवर्तन करिए। सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए। कहा भी गया है कि ‘चिंता चिता से बढ़कर है’ चिता तो मुर्दा को जलाती है, परंतु चिंता तो जीवित को जलाती रहती है। कहा गया है कि ‘गतं न शोचन्ति पण्डिता’, अर्थात् विद्वान् बीती बातों पर शोक-चिंता नहीं करते।