नीचे दिए गये गद्यांश के बाद 5 प्रश्न दिए गयें हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर चुनें।
मानव की दो मूल प्रवृत्तियां होती हैं। एक तो यह कि लोग हमारे गुणों की क़द्र करें, हमें दाद दें और हमारा आदर करें और दूसरे वे हम पर प्रेम करें, हमारा अभाव महसूस करें, उनके जीवन में हम कुछ महत्त्व रखते हैं- ऐसा अनुभव करें। आपके ज़रा से कार्य की यदि किसी ने सच्चे दिल से प्रशंसा की या कोई आपकी सलाह माँगने आता है तो आपका दिल कैसा खिल उठता है? ऊपर से कोई बड़ा आदमी कितना भी आत्मविश्वासी और आत्मसंतुष्ट क्यों ना दिखाई दे, भीतर से वह हमारी-आपकी तरह प्रशंसा का, प्रोत्साहन का, स्नेह का भूखा है। यदि आप उसे, प्रेमपूर्वक ले सकें तो आप फ़ौरन उसके हृदय के निकट पहुँच जायेंगे। दूसरों की भावनाओं को ठीक-ठाक समझना, उनकी क़द्र करना, उनके साथ सच्चाई और स्नेह का व्यवहार करना यही व्यवहारकुशलता है। इसी से सामाजिक जीवन में लोकप्रियता के दरवाजे खोलने की कुंजी हाथ लगती है। इससे हमारी अपनी सुख-शांति बढती है।