नीचे दिए गए गद्यांश के बाद ५ प्रश्न दिए गए हैं। इस गद्यांश को ध्यान पूर्वक पढ़े और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर चुनें।
हँसी भीतरी आनंद का बाहरी चिह्न है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम से उत्तम वस्तु है हँसी। पुराने लोग कह गए हैं - हँसो और पेट फुलाओ। जितना भी अधिक आनंद से हँसोगे, उतनी ही आयु बढ़ेगी। एक यूनानी विद्वान कहते हैं कि सदा अपने कार्यों को सीखने वाला हेरीक्लोस बहुत कम जिया, पर प्रसन्न मन डेमाक्रिप्स 109 वर्ष तक जिया। हँसी-खुशी का नाम जीवन है। जो रोते हैं, उनका जीवन व्यर्थ है। कवि कहता है- ज़िंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं। हँसी शरीर और मन दोनों को प्रसन्न रखती है। हँसी पाचन शक्ति और रक्त को बढ़ाती है, साथ ही अधिक पसीना लाती है। हँसी एक शक्तिशाली दवा है जो स्वभाव को अच्छा करती है और बुद्धि को निर्मल करती है।