Comprehension Passage

निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

आदि से ही विकास क्रम में पशुता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्यता हमारे युग-युगान्तर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित अमुल्यनिधि है। इसी से हम अपने पूर्व स्वप्न के लिए, सामंजस्यपूर्ण आदर्श के लिए और उदात्त भावनाओं के लिए प्राण की बाजी लगाते रहे हैं। जब हममें ऐसा करने की शक्ति शेष नहीं रह जाती तब हम एक मिथ्या दम्भ के साथ पशुता की ओर लौट चलते हैं क्योंकि वहाँ पहुँचने के लिए न किसी पराक्रम की आवश्यकता है और न साधन की और पशुता के आदी हो चुके हैं सो अलग। हम अपने शरीर को निश्चेष्ट छोड़कर हिमालय के शिखर से पाताल की गहराई तक सहज ही लुढ़कते चले आ सकते हैं। परन्तु उस ऊँचाई के सहस्त्र अंशो तक पहुँचने में हमारे पाँव काँपने लगेंगे, साँस फूलने लगेगी और आँखों के सामने अँधेरा छा जाएगा, आदि।  

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार, कौन-सा कथन सही है?

1
विकास क्रम में मनुष्यता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और पशुता हमारे युग-युगान्तर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित अमूल्यनिधि है।
2
विकास क्रम में पशुता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्यता हमारे युग-युगान्तर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित निधि है।
3
विकास क्रम में मनुष्यता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्पयता ही हमारे युग-युगान्तर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित अमूल्यनिधि है।
4
विकास क्रम में पशुता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्यता हमारे युग-युगान्तर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित अमूल्यनिधि है।

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