निम्नलिखित में से कौन सा उदाहरण शृंगार रस का नहीं है?
1
बरतस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय, सौंह करें, भौंहनि हँसे, देन कहे नटि जाए
2
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई। जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।’
3
बसों मेरे नैनन में नन्दलाल मोर मुकुट मकराकृत कुंडल, अरुण तिलक दिये भाल
4
बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी।