Comprehension Passage
प्रेमचन्द की जो सबसे बड़ी शक्ति है, वह अधिकांश आलोचकों ने पहचानी ही नहीं है। वह है आचरण की भूमि। प्रेमचंद के जीवन-चित्रण और आचरण में पूर्ण साम्य है। उनका समस्त साहित्य उनकी आत्माभिव्यक्ति है। असंख्य पात्रों में उनकी अपनी सात्विकता चरितार्थ ही है। अपने नैतिक, राष्ट्रीय और भावुक व्यक्तित्व को अनेकानेक कल्पित नर-नारियों के चरित्र में बाँटकर वे अपने साहित्य-जगत् पर छा गए हैं। उनके लिए साहित्य आचरण से स्वतंत्र कलाकर्म मात्र नहीं है। उनके पात्रों पर दया, क्षमा, ममता, ओजस्विता और। बलिदानशीलता प्रेमचंद की अपनी अनुभूति है। सामग्रिक सम्पृक्ति का ऐसा उदाहरण विरले ही मिलेगा। प्रेमचन्द के प्रत्येक पात्र पर उनके व्यक्तित्व तथा आचरण की छाप है। वह अपने पात्रों का जीवन जिए हैं और उन्होंने अपने आचरण की सम्यक्ता और पवित्रता का झीना आवरण अपनी कला सृष्टि पर डाल दिया है । इसलिए वे तटस्थ कलाकार नहीं कहे जा सकते। वे परिबद्ध हैं, अपने युगमानव से क्षण-प्रतिक्षण सम्पृक्त हैं। प्रेमचन्द के चरित्र की पवित्रता ही उनके पात्रों को पवित्रवादी बना देती हैं। आचरण के द्वारा ही हम जीवन से सम्पृक्त होते हैं और जिस कलाकार के पास आचरण का बल नहीं है, वह पाठकों के अन्तर्मन में प्रवेश प्राप्त करने का अधिकारी नहीं होता । जिस कलाकार की कलम से एक भी अनैतिक वाक्य नहीं निकला, दैहिक आवेश का एक भी स्पन्दन नहीं उभरा, वासना, कटुता और घृणा से जिसका कोई पात्र विषाक्त नहीं हुआ, उस कलाकार की जीवन-चेतना हमारी उदात्त नैतिक चेतना का पर्याप्य ही होगी। प्रेमचन्द नीति के कलाकार है, क्योंकि वे जीवन शिल्पी है।
समूह से भिन्न शब्द है:
1
वासना
2
कटुता
3
घृणा
4
उभरा