Comprehension Passage
बाबू कुँवर सिंह ने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् 1827 ई. में अपनी रियासत की जिम्मेदारी सँभाली। उन दिनों ब्रिटिश हुकूमत का अत्याचार चरम सीमा पर था। इस अत्याचार का विरोध तथा इस व्यवस्था को बदलने का संकल्प बाबू कुंवर सिंह ने मन-ही-मन ले लिया,और उस दिन की प्रतीक्षा करने लगे, जब उन्हें अंग्रेजों से लोहा लेने का सही समय मिलेगा।1857 की क्रांति का शंखनाद हो चुका था। बाबू कुँवर सिंह इसी अवसर की तलाश में थे। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरोध का बिगुल विद्रोह कर दिया। 25 जुलाई, 1857 को दानापुर छावनी की सैनिक टुकड़ी ने विद्रोह कर दिया। बाबू कुँवर सिंह का सम्पर्क इनसे पहले से ही था। सैनिक सोन नहर पार कर आरा की ओर चल पड़े। आरा पहुँचकर सैनिकों ने बाबू कुँवर सिंह का जयघोष करते हुए जेल की सलाखें तोड़ डाली और कैदियों को आजाद करा लिया। 27 जुलाई, 1857 को बाबू कुँवर सिंह ने आरा पर विजय प्राप्त की तथा सिपाहियों ने उन्हें फौजी सलामी दी। इस समय तक आरा 1857 की क्रांति के विद्रोह का केन्द्र स्थल तथा बाबू कुँवर सिंह इस क्रांति के नेता के रूप में उभर चुके थे।
बाबू कुँवर सिंह ने किस व्यवस्था को बदलने का संकल्प लिया था?
1
सामाजिक व्यवस्था
2
राजनीतिक व्यवस्था
3
आर्थिक व्यवस्था
4
शिक्षा व्यवस्था