निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अमावस्या के अंधकार को यम का दूत समझा जाता था और उन्हीं की पूजा के लिए दीप जलाए जाते थे। आज यम को मृत्यु का देवता मानकर उनकी अचानक कल्पना कर ली गई है, परन्तु ऋग्वेद में वे जीवन और मांगल्य के प्रतीक थे। दीपावली का पर्व स्मृतियों का संसार लेकर आता है इसी पुनीत अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र ने दुराचारी लंकेश का संहार करके अयोध्या की ओर प्रस्थान किया था साकेत निवासियों ने इसी प्रसन्नता में दीप जलाए थे।
कार्तिक की इसी अमावस्या के दिन द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने क्रूरकर्मी बकासुर का वध किया था जैनमत के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी का भी यह निर्वाण दिवस है। पन्द्रहवीं शताब्दी में इसी दीपावली के दिन सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव की जन्म हुई थी। इस दिन स्वामी रामतीर्थ और आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती ने अनन्त की राह ली थी। इस प्रकार यह महोत्सव इन सब महापुरुषों की याद दिलाकर मनुष्य मात्र को उनके दिखलाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।