निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ है?
1
है शत्रु भी यों मग्न जिसके शौर्य-पारावार में |
2
पीपर पात सरिस मन डोला
3
अस कही कुटिल भई उठि ठाढ़ी | मानहूँ रोष तरंगिनी बाढ़ी ||
4
देख लो साकेत नगरी है यही | स्वर्ग से मिलने मगन में जा रही ||
5
उपर्युक्त में से कोई नहीं