निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर दिये गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदला है। आधुनिक काल में मानव सभ्यता विकास के नित नए सोपान पर पहुँचती जा रही है। विज्ञान के विकास के साथ औद्योगीकरण, नगरीकरण ने मानव सभ्यता को विकास के नये सोपान पर पहुँचाया। औद्योगीकरण ने पूँजीवाद को जन्म दिया। पूँजीवाद के प्रसार के साथ दुनिया में उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद को बढ़ावा मिला। दूसरी तरफ राजनीतिक चिन्तन में व्यक्तिवाद, उदारवाद के साथ लोकतंत्र का उदय भी आधुनिककाल की महत्वपूर्ण वैश्विक परिघटना है। राष्ट्र-राज्यों का उदय हुआ जिसका विकृत रूप प्रसारवाद के चलते साम्राज्यवाद में तबदील हो गया। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में दो विश्व युद्ध इसकी चरम परिणति थे। दूसरी तरफ बीसवीं शताब्दी में ही मार्क्सवाद ने दुनिया के बड़े हिस्से का तंत्र ही बदल डाला। डार्विन के विकासवादी सिद्धान्त, फ्रायड के मनोविश्लेषण और मार्क्स के साम्यवाद ने आधुनिक मानव सभ्यता को अपने-अपने तरीके से गहरे रूप में प्रभावित किया।