साहित्य के विकास में प्रतिभाशाली मनुष्यों की तरह जन-समुदायों और जातियों की विशेष भूमिका होती है। इसे कौन नहीं जानता कि यूरोप के सांस्कृतिक विकास में जो भूमिका प्राचीन यूनानियों की है, वह अन्य किसी जाति की नहीं। जन समुदाय जब एक व्यवस्था से दूसरी व्यवस्था में प्रवेश करता है, तब उसकी अस्मिता नष्ट नहीं हो जाती। प्राचीन यूनान अनेक गण-समाजों में बँटा हुआ था। आधुनिक यूनान एक राष्ट्र है। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान इस देश ने इसी तरह अपनी एकात्मकता पहचानी इतिहास का प्रवाह ही ऐसा है कि विच्छिन्न है और अविच्छिन्न थी। मानव समाज बदलता है और अपनी पुरानी अस्मिता कायम रखता है। जो तत्त्व मानव समुदाय को एक जाति के रूप में संगठित करते हैं, उनमें इतिहास और सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर निर्मित यह अस्मिता का ज्ञान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। बंगाल विभाजित हुआ और है, किंतु जब तक पूर्वी और पश्चिमी बंगाल के लोगों को अपनी साहित्यिक परंपरा का ज्ञान रहेगा तब तक बंगाली जाति सांस्कृतिक रूप से अविभाजित रहेगी। विभाजित बंगाल से विभाजित पंजाब की तुलना कीजिए, तो ज्ञात हो जाएगा कि साहित्य की परंपरा का ज्ञान कहाँ ज्यादा है और कहाँ कम और इस न्यूनतम ज्ञान के सामाजिक परिणाम क्या होते है।