निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
कल्पनाशीलता बच्चों का नैसर्गिक गुण है। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि वे दुनिया में हम बड़ों द्वारा बनाए गए कायदों को नहीं जानते। न जानना या कम जानना उनकी कल्पनाशीलता की उड़ान को पंख देता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है कल्पनाशीलता की जगह यथार्थ लेने लगता है क्योंकि चाहे-अनचाहे वह दुनिया के प्रचलित कायदे मानने लगता है। छोटे बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर संवेदनशील न हों तो कल्पनाशीलता को हाशिए पर ढकेलने की अंजानी शुरुआत छोटी क्लास से ही हो जाती है। अब सवाल यह है कि कल्पनाशीलता को बचाना इतना जरूरी क्यों है? हमारे वक्त के जरूरी कवि विनोद कुमार शुक्ल अपने एक इंटरव्यू में कहते हैं कि माँ अक्सर कहती थीं, परेशान मत हो सब ठीक हो जाएगा। सब ठीक हो जाएगा, यह कल्पना ही तो है। जीवन में सब कभी ठीक नहीं होता। लेकिन मनुष्य के पास सब ठीक हो जाने की कल्पना न हो तो वह यथार्थ का मुकाबला नहीं कर पाएगा। जीवन के प्रति विनोद जी की समझ का सहारा लेते हुए मैं कहना चाहता हूँ कि बच्चों ! कार उड़ सकती है, लेकिन यथार्थ में उड़ने से पहले उसे कल्पना में उड़ना होगा।