Comprehension Passage
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए:
जीवन की कला ठूँठ की तरह खड़े रहने में नहीं है। यह पेड़ जो अपनी जवानी में ही सूख गया, बाद में कैसा होगा ? कारण यह है कि इसकी जड़ों ने रस लेना बंद कर दिया। जीवन में लहलहाने का एक ही तरीका है कि उसे विभिन्न रसों को लेने दो। एक विशेष विषय में निपुण होने का तात्पर्य यह नहीं है कि तुम फुटबाल के ग्राउंड में मत जाओ, पुस्तकों के कीड़ें मत बनों, कि यार दोस्तों की हँसी बुरी लगने लगे। जीवन में विविध रस लेना सीखो और इतना रस लो कि बुढ़ापे की झुर्रियों में उदासीनता और निराशा की एक भी झुर्री न पड़े। वस्तुत: जीवन का आनंद इसमें है कि गले में संगीत हो, होठों पर मुस्कुराहट हो, आँखों में हँँसी हो और हृदय में उमंग हो।
जीवन की कला को ठूँठ की तरह बन जाने से रोकने के लिए जरूरी है:
1
शांति से जीवन जीना चाहिए
2
कष्टों का सामना करना चाहिए
3
जैसे भी हो जीवन को रस लेने दो
4
फुटबॉल नहीं खेलना चाहिए