निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढकर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए:
समूची स्वार्थी व अहं-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमें लोक-संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होते | दूसरे, भले ही आप अपने सामने एक ऊँचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित हैं तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसंद-नापसंद से किए जाते कार्य वासनओं को बढाए बिना नहीं रहते | कोई काम आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसंद है | उसी तरह कोई काम करने से आपको महज इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह काम आपका मनचाहा नहीं है | कार्य का निर्णय बुध्दी-विवेक के आधार पर होना चाहिए, मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं | इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसंद और नापसंद आपके सबसे बडे शत्रु हैं | आप इन्हें पहचानते तक नहीं | उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं | वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं | इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रूचि और अरूचि का विश्लेषण करें |