निर्देश: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
किसी समाज में होने वाले परिवर्तनों को ठीक तरह से समझे बिना उसमें सक्रिय और सार्थक हिस्सेदारी संभव नहीं होती। सामाजिक परिवर्तन अप्रत्याशित नहीं होते। उनके पीछे हमेशा एक सुदीर्घ पृष्ठभूमि होती है। हमारे वर्तमान समाज को रूपाकार देने में अगर उन्नीसवीं सदी के नवजागरण की केंद्रीय भूमिका है तो इस नवजागरण के स्वरूप को भलीभाँति समझना आज के समाज के लिए आवश्यक है। स्वयं नवजागरण के सम्यक् बोध के लिए ऐतिहासिक परिवेश के अलावा उसकी पृष्ठभूमि का व्यवस्थित अध्ययन अपेक्षित है। नवजागरण की चिंताएँ, उसके कई असमंजस उस सांस्कृतिक आंदोलन में देखे जा सकते हैं जिसे डॉ. रामविलास शर्मा नवजागरण का पहला दौर कहते हैं। नवजागरण का पहला दौर अर्थात भक्ति आंदोलन की प्रतिच्छाया उन्नीसवीं सदी की अंतश्चेतना पर पड़ी थी। साथ ही, चूंकि भक्ति आंदोलन की परिणतियाँ लोक चित्त में घुल मिल गई थीं इसलिए प्राय: सभी परिवर्ती सांस्कृतिक राजनीतिक परिघटनाओं पर इसका न्यूनाधिक असर पड़ा है। भक्ति आंदोलन पर इसलिए लगातार चिंतन मनन जरूरी है। नवजागरण के दौर में भक्ति संवेदना हमारे आलोचकों के लिए अनिवार्य संदर्भ बिंदु रही। क्योंकि अलग अलग तरह के वैचारिक प्रस्थानों ने मध्ययुगीन भक्ति आंदोलन से अपने अनुकूल तर्क और प्रतिमान गढ़ने चाहे इसलिए इस आंदोलन की ‘सही व्याख्या’ का ऐतिहासिक विवाद हुआ।