निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर- वाले विकल्प का चयन कीजिए -
जो लोग अपनी असफलताओं के लिए या जीवन में गतिरोध के हालातों को जिम्मेदार ठहराते हैं, वे लोग या तो गलत हैं या हालात से डरते हैं। वे या तो जीवन को समझ नहीं पाए या उलझनों में फँसे हुए हैं। वे या तो आलसी हैं या अकर्मण्य हैं। एक कारण और भी हो सकता है कि उनकी नीयत और नीति में मेल न हो। यह अति आवश्यक है कि नीयत और नीति दोनों एक सूत्र में पिरोई हुई हों अर्थात् मेल खाती हों। ऐसा कदापि संभव नहीं है और नीयत मानसिक इच्छा है। जो खोटी भी हो सकती है और खरी भी खोटी नीयत वाला व्यक्ति कदापि इस संसार में नहीं टिक सकता और यदि टिकेगा, तो बहुत कम समय के लिए, केवल तब तक जब तक उसकी नीयत खुलकर सामने नहीं आती क्योंकि नीति की जननी नीयत है और जब जननी में ही दोष है, तो संतान में कोई न कोई विकृति अवश्य आ जायेगी। ऐसे में वह मनुष्य गलत नीयत एवं नीति के कारण पतन का भागी होगा। हालातों को असफलता के लिए जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं लगता, क्योंकि हालात तो उनके साथ भी वही होते हैं, जो सफलता प्राप्त करते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी असफलताओं की जिम्मेदारी खुद नहीं ले सकता, तो वह अपनी सफलता की जिम्मेदारी लेने के काबिल नहीं है। जीवन का असली आनंद तो तभी है, जब परिस्थितियाँ विषम हों।