नीचे दिए गये गद्य को पढे और पुछे गये प्रश्नो के उत्तर दे:
विद्यार्थियों में अनेक बुराइयाँ कुसंगति के प्रभाव से ही उत्पन्न होती हैं। जो विद्यार्थी पहले पढ़ाई में खूब रुचि लेता था, किंतु अब सिनेमा देखने में मस्त रहता है। निश्चित ही यह कुसंगति का प्रभाव है। शुरू में उसे कोई विद्यार्थी सिनेमा दिखाना प्रारंभ करता है, बाद में उसे सिनेमा देखने की आदत पड़ जाती है। यही हालत धूम्रपान करने वालों की होती है। जब उन्हें धूम्रपान की आदत पड़ जाती है, तब वह छूटने का नाम तक नहीं लेती। प्रारंभ में कुछ लोग शौकिया तौर पर बीड़ी-सिगरेट पीना प्रारंभ कर देते हैं। अंत में उसके आदी बन जाते हैं और लाख यत्न करने पर भी इससे पीछा नहीं छुड़ा पाते। इसीलिए तो पं. रामचंद्र शुक्ल ने कहा था कि कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। वह न केवल मान-मर्यादा का नाश करता है, बल्कि सात्विक चित्तवृत्ति को भी नष्ट कर देता है। जो भी कभी कुसंग के चक्कर में फँसा है, नष्ट हुए बिना नहीं रहा। कुमार्गगामी दूसरे को अपने जैसा बना लेता है।