कविता कोई हवाई चीज़ नहीं है। योगी, वैज्ञानिक अथवा समाजशास्त्री सत्य की खोज करने के लिए जितनी गहरी समाधि लगाता है, उतनी गहरी समाधि लगाए बिना कवि भी सत्य को नहीं पा सकता। किंतु, कवि और वैज्ञानिक के सत्यों में भेद है। विज्ञान स्थूलता की कला है। वह एक चीज़ से दूसरी चीज़ की दूरी मापता है, और हर चीज़ को अपनी काठ की अंगुलियों से छूकर यह बतलाता है कि वह कड़ी या मुलायम है। किंतु, कविता वस्तुओं के सूक्ष्म रूप का मूल्य ढूँढती है। वह उनके उन पक्षों का विश्लेषण करती है, जो गणित की भाषा में व्यक्त नहीं किए जा सकते। और चूँकि बुद्धि भी गणित को छोड़कर और कोई भाषा समझ नहीं सकती: इसलिए, कविता अपने विश्लेषण का परिणाम बुद्धि नहीं, बल्कि ह्रदय के सामने निवेदित करती है; क्योंकि ह्रदय उन संकेतों को समझा सकता है, जिनके माध्यम से कवि अदृश्य और अनिर्वचनीय का वर्णन करता है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उपरोक्त गद्यांश के आधार पर दीजिए-
‘अनिर्वचनीय’ का सही अर्थ क्या है?
जो वचन द्वारा कहा न जा सकता हो
बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन करना
जो प्रकट न किया जा सकता हो