Comprehension Passage

निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और पूछे गए प्रश्नों का सर्वोत्तम उत्तर चुनें

सत्य-व्यवहार एंव वचन को आखिर तप क्‍यों कहा गया है? इस प्रश्न का उत्तर सहज-सरल है कि विश्व में प्रेम और सत्य मार्ग पर चल पाना खांडे की धार पर चल पाने समान कठित हुआ करता है। सत्य के साधक और व्यवहारक के सामने हर कदम पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उसके अपने भी उस सबसे घबराकर अक्सर साथ छोड़ दिया करते हैं। सब प्रकार के दबाव और कष्ट झेलते हुए सत्य के साधक और उपासक को अपनी राह पर अकेले ही चलना पड़ता है। यदि व्यक्ति अपनी बुराई को छिपाता नहीं, बल्कि स्वीकार कर लेता है, तो उसमें सुधार की प्रत्येक संभावना बनी रहती है। लेकिन मानव अपने स्वभाव से बड़ा ही कमजोर और डरपोक हुआ करता है। वह बुराई को छिपाने के लिए अक्सर झूठ का सहारा लिया करता है। जब एक बार कोई झूठ बोलता है तो उसे छिपाने के लिए उसे एक-के-बाद-एक निरंतर झूठ की राह पर बढ़ते जाने के लिए विवश होते जाना पड़ता है। फिर किसी भी प्रकार झूठों और झूठे व्यवहारों से पिंड छुड़ाना मुश्किल हो जाया करता है। मनुष्य सभी का घृणा का पात्र बनकर रह जाता है। जीवन एक प्रकार का बोझ साबित होने लगता है। इन्हीं सब व्यवहार मूलक तथ्यों के आलोक में सत्य के शोधक संत कवि ने झूठ को सबसे बड़ा पाप उचित ही ठहराया है।

जीवन' का विलोम शब्द क्या है?

1
मरण
2
प्राण
3
जान
4
हयात

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation