Comprehension Passage
जीवन के फैसले मनुष्य को स्वयं करने होते हैं, इसलिए आदमी को आत्मनिर्भर होना चाहिए। अब तुम्हें क्या करना चाहिए, इसका ठीक-ठीक उत्तर तुम्हीं को देना होगा, दूसरा कोई नहीं दे सकता। कैसा भी विश्वासपात्र मित्र हो, तुम्हारे इस काम को वह अपने ऊपर नहीं ले सकता । हम अनुभवी लोगों की बातों को आदर के साथ सुनें, बुद्धिमानों की सलाह को कृतज्ञतापूर्वक मानें, पर इस बात को निश्चित समझकर कि हमारे कामों से ही हमारी रक्षा व हमारा पतन होगा, अपने विचार और निर्णय की स्वतंत्रता को दृढ़तापूर्वक बनाए रखना चाहिए। जिस पुरुष की दृष्टि सदा नीची रहती है, उसका सिर कभी ऊपर न होगा। नीची दृष्टि रखने से यद्यपि रास्ते पर रहेंगे पर इस बात को न देखेंगे कि यह रास्ता कहाँ ले जाता है । अपने व्यवहार को मृदुल बनाए रखो । कठोरता, उद्दंडता और अक्खड़पन कतई नहीं हो। अपने व्यवहार में कोमल रहो और अपने उद्देश्यों को उच्च रखो, इस प्रकार नम्र और उच्चाशय दोनों बनो। अपने मन को कभी मरा हुआ न रखो।
व्यवहार की मृदुलताः
1
मन को मरने नहीं देती।
2
पतन होने से बचाती है।
3
कठोर बनाती है।
4
नम्र और उच्चाशय बनाती है।