Comprehension Passage
बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है। जिससे हमें दुःख पहुँचा उस पर हमने जो क्रोध किया वह यदि हमारे हृदय में बहुत दिनों तक टिका रहा तो वह बैर कहलाता है। इस स्थायी रूप में टिक जाने के कारण क्रोध की छिप्रता और हड़बड़ी तो कम हो जाती है पर वह और धैर्य, विचार और युक्ति के साथ दुःखदाता को पीड़ित करने की प्रेरणा बराबर बहुत काल तक देता रहता है। क्रोध अपना बचाव करते हुए शत्रु को पीड़ित करने की युक्ति आदि सोचने का समय नहीं देता पर बैर इसके लिए बहुत समय देता है। वास्तव में क्रोध और बैर में केवल काल का भेद है। दुःख पहुँचाने के साथ ही दुःखदाता को पीड़ित करने की प्रेरणा क्रोध और कुछ काल बीत जाने पर बैर है।
उपरोक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
‘क्षिप्रता’ का आशय क्या है?
1
स्थिरता
2
शालीनता
3
शिथिलता
4
शीघ्रता