Comprehension Passage

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि यूरोप की सभ्यता सर्वथा तिरस्कार की वस्तु नहीं; क्योंकि मैं भी उस ईश्वर में विश्वास करना नहीं चाहता जो मरने के बाद मुझे शांति तो दे सकता है, किंतु जीवन में मुझे रोटी नहीं दे सकता। स्पष्ट है, स्वामी विवेकानंद भारतीय अध्यात्म का संबंध उस वस्तु के साथ जोड़ना चाहते थे जो हमारे पास नहीं थी-जो शायद, हमारे पूर्वजों के पास भी नहीं थी। उन्होंने धर्म की गोद में ऊँघते हुए भारतवर्ष को जगाने के लिए शंखनाद किया और कहा, कि तुम्हें जीवन में स्पंदन भरे वाली प्रेरणा की जरूरत है; तुम्हें शक्ति का वह विद्युत् प्रवाह चाहिए जिससे धरती जवान रहती है और जिससे यूरोप के अंग-अंग में चेतना और स्वास्थ्य का सौन्दर्य छलक रहा है।

गद्यांश के आधार पर दिए गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए: –

गद्यांश का केंद्रीय लक्ष्य क्या है?

1
भारत की सभ्यता का बखान
2
भारत और यूरोपीय सभ्यता का संघर्ष
3
यूरोपीय सभ्यता का बखान
4
भारत और यूरोपीय सभ्यता के बीच समन्वय

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation