निर्देश : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संस्कृति और सभ्यता की समानता और असमानता को इस प्रकार समझा जा सकता है कि मानवीय मेधा और प्राणशक्ति का विकास दो ही स्तरों पर घटित होता है। 1. भौतिक स्तर पर और 2. मानसिक स्तर पर। मानसिक स्तर पर यहाँ अभिप्राय मन, बुद्धि और आत्मा - इन तीनों की सम्मिलित सत्ता से है। सभ्यता मनुष्य के भौतिक स्तर का विकास है तो संस्कृति मनुष्य के मानसिक विकास का। जहाँ एक ओर सभ्यता का अर्थ मनुष्य के दैनिक जीवन की आवश्यकताओं तथा सुख-सुविधा की अतृप्त लालसा की पूर्ति के लिए निर्मित विराट तंत्र संस्थान (Techniques) से है तो दूसरी ओर सभ्यता का कार्य है एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था को जन्म देना जो नीतियों और नियमों पर आधारित हो । प्रत्येक राष्ट्र की निजी संस्कृति होती है जो उसको एक सूत्र में पिरोये रखती है- रीति-रिवाज, साहित्य, शिक्षा, कला, रहन-सहन, जीवन- दर्शन एवं मान्यताओं सभी का समाहार संस्कृति के अंतर्गत हो जाता है। संस्कृति मानव के जीवन-वृक्ष का पुष्प है। उसकी सुगंध में राष्ट्र की अस्मिता अंतर्निहित होती है।