निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
संविधान के तहत या राजकोष से राजनीति का खर्च वहन करना भी कोई नई बात नहीं है। विपक्षी सांसदों और विधायकों का खर्च राजकोष से ही आता है। यह एक पुरानी माँग है कि चुनाव का खर्च भी क्यों नहीं? राजनीति का खर्च भी क्यों नहीं? कुछ प्रकार के राजनेताओं का जीवन बचाने के लिए केन्द्रीय बजट का प्रतिमाह 51 करोड़ रुपये खर्च होता है। करोड़पति सांसदों को भी पेंशन भत्ता आदि मिलता है। इनमें से कई अनावश्यक खर्चों को काटकर देशभक्त राजनैतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक सामाजिक कोष का निर्माण शुरू हो सकता है। अगर विवेकशील लोग राजनीति में दखल नहीं देंगे तो भारत की राजनीति कुछ ही अरसे के अंदर अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के हाथों में चली जायेगी। जो लोग इसके बारे में चिंतित हो रहे हैं, उन्हें एक मूल्य आधारित राजनैतिक खेमा खड़ा करना होगा। इस खेमे के लिए एक बड़े पैमाने का कोष निर्माण करना होगा। आज की संसद या विधान सभा इसके लिए अनुदान नहीं देगी। सामाजिक और स्वैच्छिक ढंग से ही इस काम को शुरू करना होगा।