निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए व पर्श्नो के उत्तर दीजिये -
जी खोल कर हँसना-बोलना और खुशी मनाना उन्हीं लोगों का काम है जिनके शरीर भले और मन चंगे हों। लेकिन जिनके ऊपर विपत्ति और पतन की घनघोर घटा छाई हो, जिनका घर और बाहर सभी कहीं अपमान हो रहा हो और जिनकी दुर्दशा उनके सारे पौरुषेय गुणों की जड़ पर कुठार चला रही हो, उनका हँसना-बोलना और खुशी मनाना या तो नीचातिनीच प्रकार की मूर्खता है या फिर पूरा पागलपन। हमारे सामने होली उपस्थित है। वह रूढ़ि और समाज के नाम पर हमसे अपील करती है कि जी भर हँसो और जी भर खुशी मनाओ लेकिन उसी के मुकाबले में हमारे सामने, नहीं, उन सबके सामने भी जिनके होली अपना मनोहर संदेश रख रही है, देश और जाति की भयंकर दुर्दशा, उनका हर जगह का अपमान, उनकी उन्नति की जड़ पर कुछार चलाने वाली शक्तियाँ, उनको अंधकार में जबर्दस्ती घसीटे लिये जाने वाली रूढ़ियाँ, नीच-ऊँच का विचार, झूठी बातों पर गर्व, स्वार्थ, फूट, निर्बलता, का पुरुषता आदि-आदि की भयंकर मूर्तियाँ नाच-नाच कर अपने विकट हास्य से हमारे सारे हौसलों को पस्त कर रही हैं। हमें देश के बड़े भविष्य में पूरा विश्वास है। हमें अपने देश वालों की उज्ज्वल उन्नति का दृढ़ निश्चय है। संसार में उच्च से उच्च मानसिक, नैतिक, आत्मिक, शारीरिक और आर्थिक जो उन्नति हो सकती है, हमें विश्वास और पूरा विश्वास है कि हम और हमारा देश उसे एक-न-एक दिन अवश्य पावेंगे। संसार अभी चाहे जितना टेढ़ा रहे और आगे भी वह हमारे रास्ते में चाहे जितने काँटे बोवे, लेकिन हमारे जातीय जीवन में एक दिन ऐसा अवश्य होगा कि उसे हमारे रास्ते में अपनी आँख तक बिछानी पड़ेगी।