निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
हिंदी साहित्य इतिहास को चार भागों में बाँटा गया है - आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल । "भक्तिकाल' को हिंदी साहित्य का स्वर्णकाल कहा जाता है। भक्तिकालीन प्रमुख कवियों में सूर, कबीर, तुलसी, जायसी, मीरा आदि का नाम लिया जाता है। इनमें से कवि सूरदास जी को कौन नहीं जानता? भक्तिकाल कृष्णोपासक कवि सूरदासजी ने सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी आदि का अनमोल खजाना हिंदी साहित्य को दिया है। उनके पदों में वात्सल्य, श्रृंगार एवं शांत रस के भाव प्राप्त होते हैं। वे वात्सल्य रस के पिता कहलाते हैं। उनके लिए कहा गया है कि 'सूर सूर तुलसी ससी उडगन केशवदास । वे अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। उनके काव्य की विशेषता उसकी गेयता है। उनकी अधिकतर रचनाएं ब्रजभाषा में पायी जाती हैं, कहीं-कहीं पर संस्कृत व फारसी भाषा के शब्द भी पाये जाते हैं। उनकी रचनाओं में अनुप्रास, यमक, श्लेष, उपमा, उत्प्रेक्षा आदि सभी अलंकार पाये जाते हैं। वे जन्मांध थे लेकिन उनके पदों में जो वर्णन पाया जाता है, वह सजीव है। ऐसा लगता ही नहीं है कि वे जन्मांध थे। उनकी मृत्यु 1580 ई. में हुई थी। हिंदी साहित्य जगत में वे सदैव अमर रहेंगे।