दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
वाणी प्राणी की पहचान है। जिस प्रकार कौए और कोयल की पहचान उनकी वाणी से होती है, उसी प्रकार किसी व्यक्ति के आचार-व्यवहार तथा स्वभाव की परख भी वाणी द्वारा होती है। मीठी वाणी दूसरों को वश में करने की औषधि है। जब हम मधुर वाणी का श्रवण करते हैं, तब हमारा चित्त प्रसन्न हो जाता है। सज्जन सर्वदा मधुर वाणी का ही प्रयोग करते हैं, जबकि दुर्जनों की वाणी कटु तथा कर्कश होती है। मीठी वाणी शत्रु को मित्र बना सकती है, निराश व्यक्तियों में आशा, उत्साह का संचार कर सकती है। कटुवाणी हृदय में शूल की तरह चुभती है, इससे अपने भी पराए हो जाते हैं। इतना ही नहीं, कटुवाणी लड़ाई-झगड़ों यहाँ तक कि बड़े युद्ध का कारण भी बन जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति ने अपनी वाणी को वश में कर लिया और मधुर वचनों का प्रयोग सीख लिया, उसने मानो सब पा लिया। मधुर वाणी अमृत के समान काम करती है।
'कौए और कोयल की पहचान उनकी वाणी से होती है।'
वाक्य से तात्पर्य है कि _______