दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
विज्ञान ने मनुष्य को पक्का भौतिकवादी बनाकर उसके विवेक पर पर्दा डाल दिया है। उसके मन की चिरशांति और आनंदभाव भी छीन लिए हैं। अब मनुष्य को न ईश्वर का भय है, न पतन का । विज्ञान ने जहाँ यंत्र दिए, वहाँ यंत्रों द्वारा बेकारी भी दी है। कारखानों के स्वामियों के हाथ में पूँजी देकर तथा मज़दूरों को फटेहाल रखकर विज्ञान ने वर्ग संघर्ष उत्पन्न किया है। इस प्रकार वर्ग- संघर्ष का कारण होने से विज्ञान ही इस संसार में निरंतर अशांति का कारण बनकर पारस्परिक विद्वेष का विस्तार कर रहा है।
इन दोनों प्रकार के तथ्यों के आधार पर सच पूछो तो विज्ञान अपने-आप में निर्दोष है। दोष स्वयं मनुष्य जाति की अपनी इच्छाओं और तृष्णा के विस्तार का है जो उसके सदुपयोग के स्थान पर दुरुपयोग करना सिखा रही है।