"प्रसाद की रचनाओं में शब्दों के लाक्षणिक वैचित्र्य की प्रवृत्ति उतनी नहीं रही है जितनी सामने की दूरारूढ़ भावना की।"- यह कथन किसका है?

1
नन्द दुलारे वाजपेयी 
2
डॉ. नगेन्द्र 
3
महादेवी वर्मा 
4
रामचन्द्र शुक्ल 

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation