निम्न में से कौन- सा कथन ध्रुवस्वामिनी का नहीं है'
1
पुरुषों ने स्त्रियों को अपनी पशु संपत्ति समझ कर उन पर अत्याचार करने का अभ्यास बना लिया है, वह मेरे साथ नहीं चल सकता।
2
कुमार! यह मृत्यु और निर्वासन का सुख तुम अकेले ही लोगे ऐसा नहीं हो सकता।
3
ब्राह्मण न किसी के राज्य में रहता है और न किसी के अन्न से पलता है; स्वराज्य में विचरता है और अमृत होकर जीता है।
4
एक क्लीव पति के द्वारा परित्यक्ता नारी का मृत्यु-मुख में जाना ही मंगल है।