"उसने रस्सी का फंदा घड़े में डाला। दायें-बायें चौकन्नी दृष्टि से देखा जैसे कोई सिपाही रात को शत्रु के किले में सुराख़ कर रहा हो। अगर इस समय वह पकड़ ली गई, तो फिर उसके लिए माफ़ी या रियायत की रत्ती-भर उम्मीद नहीं।"
उपरोक्त कथन किस कहानी से लिया गया है?
1
मधुआ
2
ठाकुर का कुआँ
3
नीलम देश कि राजकन्या
4
अभिशप्त