"आध्यात्मिक रंग के चश्मे आजकल बहुत सस्ते हो गए हैं। उन्हें चढ़ाकर जैसे कुछ लोगों ने 'गीतगोविन्द' के पदों को आध्यात्मिक संकेत बताया है, वैसे ही विद्यापति के इन पदों को भी।" शुक्ल जी के उक्त कथन का आशय है -
1
विद्यापति के पदों को आध्यात्मिक चश्मे से देखना चाहिए।
2
विद्यापति के पदों और गीतगोविन्द में भाव-साम्य नहीं है।
3
विद्यापति के पद अधिकतर श्रृंगार के ही हैं।
4
विद्यापति के पदों की रचना भक्ति की दृष्टि से की गयी है।
5
अनुत्तरित प्रश्न