“कर कमाण सर साँधि करि, खैंचिजू मार्या माँहि ।
भीतरि भिद्या सुमार ह्वै, जीवै कि जीवै नाहिं ।”
ये पंक्तियाँ कबीर ग्रंथावली के किस अंग से ली गई हैं ?
1
सुमिरण को अंग
2
गुरुदेव को अंग
3
विरह को अंग
4
परचा को अंग
5
अनुत्तरित प्रश्न
“कर कमाण सर साँधि करि, खैंचिजू मार्या माँहि ।
भीतरि भिद्या सुमार ह्वै, जीवै कि जीवै नाहिं ।”
ये पंक्तियाँ कबीर ग्रंथावली के किस अंग से ली गई हैं ?