"मेरी आँखियाँ जान सुजान भई।
देवर ननद सुसर संग तजि करि, हरि पीव तहाँ गई।।
बालपनैं के करम हमारे, काटे जानि दई।
बाँह पकरि करि किरपा कीन्हीं, आप समींप लई।
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की है?
1
कबीर
2
सूरदास
3
अमीर खुसरो
4
घनानन्द
5
अनुत्तरित प्रश्न