"उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी- जिसमें न स्पर्धा थी और न ही किसी प्रकार की हार या जीत का भाव।"- शेखर जोशी ने अपने 'गलता लोहा' पाठ में यह कथन किसके लिए कहा है?

1
वंशीधर 
2
धनपत 
3
मोहन 
4
रमेश 
5
अनुत्तरित प्रश्न

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