"जगत-जीवन के संवेदनात्मक ज्ञान और ज्ञानात्मक संवेदना में कमाई हुई मार्मिक आलोचना दृष्टि के बिना कविक्रम अधूरा है।"- यह कथन किसका है?

1
हजारीप्रसाद द्विवेदी 
2
रामचन्द्र शुक्ल 
3
गजानन माधव मुक्तिबोध 
4
रामविलास शर्मा 
5
अनुत्तरित प्रश्न

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