टोपी पहिरे माला पहिरे, छाप तिलक अनुमाना।
साखी सब्दहि गावत भूले, आतम खबरि न जाना।
हिन्दू कहैं मोहि राम पियारा, तुर्क कहैं रहिमाना।
आपस में दोउ लरि लरि मूए, मम न काहू जाना।
घर घर मन्तर देत फिरत हैं, महिमा के अभिमाना।
गुरु के सहित सिख्य सब बूड़े, अत काल पछिताना।
कहैं कबीर सुनो हो सती, ई सब भम भुलाना।
केतिक कहीं कहा नहि माने, सहजै सहज समाना।
प्रयुक्त साखी के आधार पर बताएं की गुरु-शिष्यों की अंत में क्या गति होगी?
1
अंतकाल तक उन्हें प्रभु के दर्शन होंगे।
2
अंतकाल में उन्हें पछताना पड़ेगा।
3
अंतकाल तक ईश्वर की माया को जान जायेगे।
4
अंतकाल माया के बंधन से मुक्ति मिल जाएगी।
5
अनुत्तरित प्रश्न