'जगत-जीवन के संवेदनात्मक ज्ञान और ज्ञानात्मक संवेदना में कमाई हुई मार्मिक आलोचना दृष्टि के बिना कविकर्म अधूरा है।' पंक्ति के रचयिता है

1
अज्ञेय
2
भवानीप्रसाद मिश्र
3
मुक्तिबोध
4
त्रिलोचन
5
अनुत्तरित प्रश्न

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