सतों दखत जग बौराना।   
साँच कहीं तो मारन धार्वे, झूठे जग पतियाना।
नमी देखा धरमी देखा, प्राप्त करें असनाना।
आतम मारि पखानहि पूजें, उनमें कछु नहि ज्ञाना।
बहुतक देखा पीर औलिया, पढ़े कितब कुराना।
कै मुरीद तदबीर बतार्वे, उनमें उहैं जो ज्ञाना।
आसन मारि डिभ धरि बैठे, मन में बहुत गुमाना।
पीपर पाथर पूजन लागे, तीरथ गर्व भुलाना।

प्रस्तुत पद के संदर्भ में असत्य है?

1
झूठ कहने वालों पर विश्वास किया जाता है। 
2
लोगों की आत्मा मरी हुई है जो पत्थरों को पूजते है। 
3
इस पद में कबीर ने हिंदुओं, मुसलमानों व योगियों की मानसिकता पर प्रहार किया है। 
4
यह कबीर द्वारा रचित सबद का अंश है। 
5
अनुत्तरित प्रश्न

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