निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दें।
‘भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे। जिस बात को उन्होंने जिस रूप में प्रकट करना चाहा है उसे उसी रूप में कहलवा लिया – बन गया तो सीधे-सीधे, नहीं तो दरेरा देकर। भाषा कुछ कबीर के सामने लाचार सी नजर आती है। उसमें मानो ऐसी हिम्मत ही नहीं है कि इस लापरवाह फक्कड़ की किसी फरमाइश को नाहीं कर सके और अकह कहानी को रूप देकर मनोग्राही बना देने की तो जैसी ताकत कबीर की भाषा में है वैसी बहुत कम लेखकों में पायी जाती है। असीम, अनंत ब्रह्मानंद में आत्मा का साक्षीभूत होकर मिलना, कुछ वाणी के अगोचर पकड़ में न आ सकने ही वाली बात है।
कबीर की रचनाओं में अनेक भाषाओं के शब्द मिलते हैं, यथा - अरबी, फ़ारसी, पंजाबी, बुन्देलखंडी, ब्रजभाषा, खड़ीबोली आदि के शब्द मिलते हैं इसीलिए इनकी भाषा को ‘पंचमेल खिचड़ी’ ‘सधुक्कड़ी भाषा’ कहा जाता है।’