दिए गए गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए।
हिंदी क्षेत्र में पुनर्जागरण की चिंगारी औपनिवेशिक शोषण और दमन के प्रति असंतोष से फूटी, जिसका प्रतिफलन 1857 का औपनिवेशिक शासन से विद्रोह था। इतिहासकारों ने स्वीकार किया है कि यद्यपि इस विद्रोह के ज़ाहिर नेता ब्रिटिश शासन से असंतुष्ट भारतीय सामंत थे, पर उन्हें किसानों, सैनिकों, साधु-संतों और मुल्ला-मौलवियों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार का समर्थन प्राप्त था। यह विद्रोह अमानुषिक निर्दयता के साथ कुचल दिया गया, पर उसकी चिंगारी दमन की राख के नीचे बची रह गयी। इस राजनीतिक विद्रोह के साथ ही बंगाल का सामाजिक पुनर्जागरण हिंदी क्षेत्र में पहुँचा। बंगाल नवजागरण के एक प्रमुख नेता केशवचंद्र सेन ने पंजाब को और आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने हिंदी क्षेत्र को सामाजिक जागरण-आंदोलन के किए चुना। ठीक इसी समय सर सैयद अहमद और अब्दुल्ला साहब आदि ने मुस्लिम समाज में ‘नयी रौशनी' फैलाने का आंदोलन शुरू किया। दुर्भाग्य की बात यह हुई कि अंग्रेज़ हिंदुओं-मुसलमानों की उस एकता को, जो 1857 के विद्रोह के समय पैदा हुई थी, अपनी कूटनीतिक चालों से भंग करने में सफल हो गये। 1885 में जब इण्डियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना हुई, तब तक हिंदू और मुस्लिम समाज की फाँक चिंता जनक रूप ले चुकी थी। यह हिंदी-उर्दू क्षेत्र की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण नियति थी।