Comprehension Passage
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
क्रोध दु:ख के चेतन कारण के साक्षात्कार या परिज्ञान से होता है, अत: एक तो जहाँ कार्यकारण के संबंध ज्ञान में त्रुटि या भूल होती है, वहाँ क्रोध धोखा देता है। दूसरी बात यह है कि क्रोध करने वाला जिस ओर से दु:ख आता है उसी ओर देखता है; अपनी ओर नहीं। जिसने दु:ख पहुंचाया उसका नाश हो या उसे दु:ख पहुंचे, क्रोध का यही लक्ष्य होता है। न तो वह यह देखता है कि मैंने भी कुछ किया है या नहीं और न इस बात का ध्यान रहता है कि क्रोध के वेग में जो कुछ करूंगा उसका परिणाम क्या होगा। यही क्रोध का अंधापन है। इसी से एक तो मनोविकार ही एक दूसरे को परिमित किया करते हैं, ऊपर से बुद्धि या विवेक भी उन पर अंकुश रखता है।
क्रोध करने वाला किस ओर देखता है?
1
जिस ओर से क्रोध आता है
2
जिस ओर से प्रेम आता है
3
जिस ओर सब आते हैं
4
जिस ओर से दु:ख आता है