निर्देश: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए |
मेघदूत में कुबेर के शाप से निर्वासित एक विरही यक्ष की मनोव्यथा का मार्मिक चित्रण ललित गेय मन्दाक्रान्ता छद में किया गया है। इसके दो भाग हैं - पूर्वमेघ और उत्तरमेघ। पूर्वमेघ बाह्य प्रकृति का मनोरम चित्र है तो उत्तरमेघ अन्त: प्रकृति का अभिराम रूप। अपने कर्तव्य पालन में त्रुटि के कारण एक वर्ष के लिए निर्वासित यक्ष प्राणप्रिया से दूर रामगिरि आश्रम में किसी मेघ को देखकर प्रेम की ज्वाला धधक उठती है और कामातुर यक्ष जड़ चेतन को समान मानते हुए मेघ को ही दूत बनाकर प्रियतमा के पास भेजता है। वह रामगिरि से अलका पहुँचने का मार्ग बताते हुए अन्त में अपना संदेश सुनाता है। काव्य सौन्दर्य मेघदूत में किसी विरह विधुरा प्रेयसी के समीप मेघ को प्रेम का सन्देशवाहक बनाकर भेजने की कल्पना विश्व साहित्य में अपूर्व और हृदयाकर्षक है। वाल्मीकि रामायण में अशोक वाटिका में रावण द्वारा अपहत सीता के पास हनुमान को भेजना और महाभारत में हंस के द्वारा दमयंती के हृदय में पुण्य श्लोक राजा नल के प्रति प्रणय भाव के प्रादुर्भाव की कमनीय कथा अवश्य ही कालिदास से प्राचीनतर है किन्तु किसी अचेतन वस्तु को प्रेम प्रसंग में दूत बनाकर भेजना कवि कुलगुरू कालिदास की निःसंदेह अद्भुत मौलिक कल्पना है।