निर्देश: नीचे एक गद्यांश दिया गया है, जिसके आधार पर पाँच प्रश्न पूछे गए हैं। गद्यांश को ध्यान से पढ़िए व निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उपयुक्त विकल्पों द्वारा दीजिये-
भारत में पश्चिमी विचारों का प्रभाव हिन्दू धर्म पर भी कुछ सीमा तक पड़ा। जनसमूह तो प्रभावित नहीं हुआ, परन्तु जैसा मैं तुम्हें बता चुका हूँ, ब्रिटिश सरकार की नीति ने रूढ़िवादी लोगों की वास्तव में सहायता की, परन्तु नया मध्यम वर्ग जो अभी बन रहा था, जिसमे सरकारी कर्मचारी और व्यावसायिक लोग थे, प्रभावित हो गए थे। उन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ में पश्चिमी तरीकों से हिन्दू धर्म में सुधार लाने का प्रयत्न बंगाल में हुआ। हिन्दू धर्म के अनगिनत सुधारक अतीत में थे परन्तु नया प्रयत्न निश्चय ही ईसाईवाद और पश्चिमी विचारों से प्रभावित था। इस प्रयत्न के निर्माता राजा राममोहन राय थे, एक महान व्यक्ति और एक महान विद्वान जिसका नाम हम पहले ही सती प्रथा की समाप्ति के सम्बन्ध में ले चुके हैं। वे संस्कृत, अरबी और दूसरी कई भाषाएँ बहुत अच्छी तरह जानते थे और उन्होंने ध्यान से कई धर्मों का अध्ययन किया था, वे धार्मिक समारोह और पूजा आदि के विरुद्ध थे और उन्होंने समाज सुधार और स्त्री शिक्षा का समर्थन किया। जिस समाज की उन्होंने स्थापना की वह ‘ब्रह्म समाज’ कहलाया।