सामने टिकते नहीं बनराज पर्वत डोलते हैं,
काँपता है कुण्डली मारे समय का व्याल।
मेरी बाँह में मारुत, गरुड़, गजराज का बल है।
इन पंक्तियों में निम्न में से कौन सा रस है?
1
वात्सल्य रस
2
करुण रस
3
वीर रस
4
भक्ति रस
सामने टिकते नहीं बनराज पर्वत डोलते हैं,
काँपता है कुण्डली मारे समय का व्याल।
मेरी बाँह में मारुत, गरुड़, गजराज का बल है।
इन पंक्तियों में निम्न में से कौन सा रस है?