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भारतीय संस्कृति अपने आप में एक विलक्षण मिश्रण है जो समृद्ध इतिहास, परंपराओं, भाषाओं, धर्मों, नृत्य, संगीत, वास्तुकला, खानपान और परिधानों में विविधता को समेटे हुए है। यह विविधताओं में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है। भारतीय संस्कृति के हर पहलू में एक ऐतिहासिक विरासत और परंपराओं की गहराई में डूबी गहनता निहित है।भारतीय संस्कृति की विशेषता इसके स्थायित्व में नहीं, बल्कि इसकी अद्भुत अनुकूलनशीलता और समावेशनशीलता में है। यहां के पर्व और उत्सव सिर्फ धार्मिक प्रथाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक ऐसा मजबूत माध्यम हैं जो समाज को एक सूत्र में पिरो देते हैं। दिवाली, ईद, क्रिसमस, वैसाखी, ओणम और पोंगल जैसे पर्व विविध धार्मिक पृष्ठभूमियों के लोगों को एकजुट करते हैं।भारतीय साहित्य, जिसमें वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण और भगवद गीता जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ शामिल हैं, ने विश्व के साहित्यिक खजाने में अपना एक विशेष स्थान बनाया है। इन साहित्यिक कृतियों ने न केवल नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को संवारा है, बल्कि जीवन के संघर्ष और मोक्ष की प्राप्ति की अद्भुत बोधकथाओं का प्रसार भी किया है।भारतीय कला और वास्तुकला ने भी विश्व को अपनी अनूठी शैलियों से प्रभावित किया है। चाहे ताजमहल की बेजोड़ सुंदरता हो, कोणार्क का सूर्य मंदिर या अजंता-एलोरा की गुफाएँ, इन सभी ने भारतीय वास्तुकला के वैभव को सारे विश्व में प्रसिद्ध बनाया है।खानपान की बात करें तो, भारतीय भोजन में मसालों का समृद्ध इस्तेमाल, विविध तासीर और स्वाद का मिश्रण विश्वभर के लोगों को आकर्षित करता है। भारतीय खाना न केवल जीभ के स्वाद को संतुष्ट करता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी अद्भुत लाभदायक होता है।भारतीय संस्कृति अपने आप में गहरे दार्शनिक और आध्यात्मिक मूल्यों को समाहित करती है। आध्यात्मिकता और धर्मनिरपेक्षता का सह-अस्तित्व भारतीय संस्कृती की अनूठी विशेषता है।अंततः, भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलू एकता, सामाजिक समरसता और सहिष्णुता की ओर अग्रसर करता है। इसकी विविधता और समृद्धि न केवल भारत को एक अनूठा देश बनाती है, बल्कि विश्व के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। भारतीय संस्कृति ने समय की कसौटी पर खरा उतरते हुए न केवल अपनी विरासत को बचाए रखा है, बल्कि नई पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया है।