Comprehension Passage

नीचे दिए गए काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए।

मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।

आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली,

दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली,

पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।

मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।

पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए,

आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए,

बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूँघट सरके।

बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की

'बरस बाद सुधि लीन्हीं' -

बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की।

काव्यांश में 'अकुलाईलता' किसके प्रतीक के रूप में है?

1
मुरझाई बेल
2
थकी हुई प्रौढ़ा
3
व्याकुल प्रियतमा
4
सूखी पगडंडी

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