अट नहीं रही है
आभा फागुन की तन
सट नहीं रही है।

कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है।

कवि के अनुसार घर घर में क्‍या भर जाता है ?

1
धुआं
2
जल
3
फागुन मास की शोभा 
4
वर्षा का पानी 

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