मंद - गंध - पुष्प - माल,

पाट - पाट शोभा श्री

पट नहीं रही है।' इन पंक्तियों के रचनाकार हैं

1
नागार्जुन
2
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
3
मंगलेश डबराल
4
ऋतुराज

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